हर किसी मे बुराई भी है
और अच्छाई भी
और ये हम पर निर्भर करता है
कि हम अपने ऊपर किसे हावी होने देते हैं
अच्छाई को या बुराई को
ये भी होता है कि
जब हम अच्छे मिजाज में होते हैं
तो हमारे मुंह से हरेक के लिए बढ़िया बात निकलती है
जब हम खराब मूड में होते हैं
हरेक एक लिए खरी खोटी तैयार है हमारे मुख से
यदि हमारा दोस्त भी सामने आ जावे उस समय
हो सकता है उसे भी ना बख्शें
यही इंसान का स्वभाव है
ऊपर वाले ने हमें भेजा ही है गलतियों का पुतला बनाकर
इसी बेतुके तुके स्वभाव पर काबू रखने में,
इस पर लगाम कसने में
मददगार,
प्रकृति ध्यान बहुत ही कारगर साबित है।