बस आप बदल जाएं
दुनिया तो बदलेगी नहीं
लड़ाई झगड़े की आदत सी पड़ गई है सबको
अलग अलग धर्म की लड़ाई
तो फिर धर्म का फायदा ही क्या हुआ
धर्म वो जो आप अपने घर में मनाएं
घर के बाहर जाते ही धर्म अधर्म हो जाता है
ये बात कोई नहीं जानता ना मानता
फिर बड़े छोटे की लड़ाई
फिर बड़ी बड़ी संस्था की लड़ाई
जहां कोई बड़ी संस्था बनी नहीं वहां लड़ाई
क्योंकि अब काम तो कोई करना चाहता नहीं
बहाने हर कोई ढूंढता रहता है
तो बस आप बदल जाएं
दुनिया तो बदलेगी नहीं
कोई गुस्सा, चिड़चिड़ापन, या अटपटे तरीके से पेश आए
वो उसका व्यवहार और संस्कार
आप उसे भी दें प्रेम, शांति, संतोष, त्याग, सदभावना इत्यादि
और ये भी सच है कि
आनंद, मौज, मस्ती उनके पास नहीं जो लड़ाई में ही व्यस्त और संगलित हैं......