60 मिनट

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60 मिनट

60 मिनट से ज्यादा कभी नहीं बैठना है
प्रकृति पर्यावरण के आसपास आनंद लेना है आराम से कहीं भी विराजमान होकर
कोई जाप नहीं करना है
ऊपर वाला तो हर जगह हैं
तो कोई जाप या मंत्र पढ़ने की आवश्यकता नहीं

और मन मे जो विचार आ जा रहे हैं उन्हें आने जाने दीजिए
उनसे लड़िए मत
क्योंकि आपके विचार ही आपके दोस्त हैं
आपके जीवन साथी हैं
धीरे धीरे आपके सारे ही विचार मधुर होते चले जाएंगे, अगर उनमें जरा सी भी आपको कमी महसूस होती है कहीं

किसी और की आपको आवश्यकता भी नहीं
ऐसा आपको महसूस होगा
और इसमें कोई बुराई भी नहीं
60 मिनट के पशचात आप अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में लौट सकते हैं
आपको एहसास होगा एक नयापन, स्फूर्ति, उमंग, तंदरुस्ती।